शिक्षा सत्र 2025-2026: गतिविधियाँ [Activites]
प्रतिष्ठा पितामह पं. श्री गुलाबचंद जी 'पुष्प' की पुण्य स्मृति में ब्र. जयकुमार 'निशांत' एवं पुष्प परिवार के सहयोग से एवं नवागढ समिति द्वारा संचालित श्री गुरुकुलम्
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19 मार्च 2026: श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में शैक्षणिक सत्र 2025-2026 की वार्षिक परीक्षा देते हुए सभी कक्षाओं के छात्र...
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26 जनवरी 2026: 76वें गणतंत्र दिवस के पावन एवं गौरवपूर्ण अवसर पर ध्वज वंदन एवं भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन...
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रध्वज फहराकर हम अपने संविधान, स्वतंत्रता सेनानियों तथा देश की एकता और अखंडता को नमन करा। साथ ही विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कर कार्यक्रम की शोभा बड़ाई।
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08 दिसंबर 2025: अर्धवार्षिक परीक्षा देते हुए श्री नवागढ़ गुरुकुलम के सभी कक्षाओं के छात्र...
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श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में महानुभावों के सान्निध्य से विद्यार्थियों में संस्कारों का सतत आरोपण...
श्री नवागढ़ गुरुकुलम् भारतीय शिक्षा परंपरा का एक ऐसा पावन केंद्र है, जहाँ शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र, संस्कार और जीवन मूल्यों का निर्माण करना भी है। गुरुकुलम् की यह विशेषता है कि यहाँ विद्यार्थियों को समय-समय पर क्षेत्र पर पधारने वाले विशेष महानुभावों का सान्निध्य प्राप्त होता रहता है, जिनके द्वारा दी गई जीवनोपयोगी शिक्षा बच्चों के जीवन में गहरा प्रभाव छोड़ती है।
जब समाज के अनुभवी, विद्वान, साधक एवं सेवाभावी महानुभाव श्री नवागढ़ क्षेत्र में पधारते हैं, तब गुरुकुलम् के विद्यार्थियों के लिए यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं होता। उनके विचार, अनुभव और जीवन दर्शन विद्यार्थियों को केवल सुनने का ही नहीं, बल्कि आत्मसात करने का अवसर प्रदान करते हैं। महानुभाव अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से बच्चों को सत्य, अहिंसा, संयम, अनुशासन, सेवा और नैतिकता जैसे मूल्यों का महत्व समझाते हैं।
इन प्रेरणादायी सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह बोध कराया जाता है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में उत्तीर्ण होना या रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक सुसंस्कृत, जिम्मेदार और चरित्रवान नागरिक बनना है। महानुभाव बच्चों को समय का सदुपयोग, बड़ों का सम्मान, माता-पिता और गुरुजनों के प्रति श्रद्धा तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं।
गुरुकुलम् का वातावरण स्वयं में ही अनुशासन और संस्कारों से परिपूर्ण है, किंतु जब महानुभावों का मार्गदर्शन उसमें जुड़ता है, तब यह प्रभाव और अधिक सशक्त हो जाता है। उनके सरल, सहज और प्रेरक शब्द विद्यार्थियों के मन में सकारात्मक सोच उत्पन्न करते हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, विनम्रता, सहनशीलता और सेवा-भाव का विकास होता है।
इन अवसरों पर विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की भी सीख दी जाती है। महानुभाव बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संयम और नैतिक मूल्यों को अपनाकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह शिक्षाएँ विद्यार्थियों को भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिए मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती हैं।
समय-समय पर होने वाले ऐसे संस्कारात्मक कार्यक्रम गुरुकुलम् की शिक्षा प्रणाली को और अधिक समृद्ध बनाते हैं। विद्यार्थियों के मन में यह भाव दृढ़ होता है कि जीवन केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के हित के लिए भी है। वे सेवा, सहयोग और सद्भाव के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।
अंततः कहा जा सकता है कि श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में क्षेत्र पर पधारने वाले विशेष महानुभावों द्वारा दी जाने वाली जीवनोपयोगी शिक्षा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इनके सान्निध्य से बच्चों में समय-समय पर संस्कारों का आरोपण होता रहता है, जो उन्हें एक आदर्श, सुसंस्कृत और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में अग्रसर करता है। यही गुरुकुलम् की शिक्षा परंपरा की वास्तविक सफलता और पहचान है।
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14 नवंबर 2025: नवागढ़ गुरुकुलम् में बाल दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया...
अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने नेहरू जी के आदर्शों व शिक्षा के महत्व पर रखे विचार, बच्चों को उपहार वितरित, कार्यक्रम सकारात्मक ऊर्जा के साथ सम्पन्न हुआ।
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05 अक्टूबर 2025: “गुरुकुलम में गूंजी जय गुरु की ध्वनि” ...
अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में आचार्य श्री विद्यासागर जी गुरुदेव का जन्मदिवस श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया
अतिशय क्षेत्र नवागढ़ का वातावरण रविवार को अध्यात्म, भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा जब विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी गुरुदेव के पावन जन्मदिवस के अवसर पर गुरुकुलम में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। छोटे-छोटे बच्चों ने अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ गुरुदेव का पूजन-अर्चन किया। मंच को पुष्पों और चित्र सज्जा से सुसज्जित किया गया, जहां “जय गुरुवर विद्यासागर” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में डूब गया।
बच्चों की मासूम वाणी में जब गुरुदेव के स्तुतिगान गूंजे तो उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा। इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों ने भी अपने विचार रखे और आचार्य श्री के व्यक्तित्व एवं उनके आदर्श जीवन पर प्रकाश डाला।
आदरणीया संध्या दीदी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी का जीवन त्याग, संयम और साधना का अप्रतिम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि गुरुदेव ने अध्यात्म के पथ पर चलकर समूचे समाज को जीवन का सच्चा अर्थ सिखाया है। दीदी ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे गुरुदेव के आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन को मूल्यवान बनाएं।
क्षेत्र निर्देशक आदरणीय जय कुमार जी निशांत जी ने कहा कि आचार्य श्री का जीवन समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का हर क्षण लोककल्याण में समर्पित रहा है। जय कुमार जी ने बच्चों को संदेश दिया कि वे अपने गुरु के बताये मार्ग पर चलें और अपने जीवन में सदाचार व संयम का समावेश करें। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची महानता भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि आत्मबल और सेवा में है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे सदैव धर्म और अनुशासन के पथ पर चलें।
कार्यक्रम के अंत में क्षेत्र प्रबंधक श्री प्रवीण जी ने सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में धर्म, संस्कार और गुरु भक्ति की भावना को जागृत करते हैं। उन्होंने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि गुरुकुलम सदैव ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।
✨ अंत में बच्चों ने “जय गुरु विद्यासागर” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना दिया और कार्यक्रम का समापन मंगल पाठ के साथ हुआ।
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श्री अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी में गुरुकुलम् के विद्यार्थियों का जन्मदिन – संस्कार, सेवा और उत्साह का अनूठा संगम
श्री अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी केवल एक तीर्थस्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षा का जीवंत केंद्र है। इसी पावन भूमि पर संचालित गुरुकुलम् में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ‑साथ संस्कारों पर विशेष बल दिया जाता है। यहाँ विद्यार्थियों का जन्मदिन मनाने की परंपरा भी साधारण न होकर अत्यंत प्रेरणादायक, अनुशासित और आध्यात्मिक भावना से ओत‑प्रोत होती है।
गुरुकुलम् में जन्मदिन को केवल केक काटने या औपचारिक उत्सव के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे आत्मचिंतन, कृतज्ञता और सेवा के अवसर के रूप में मनाया जाता है। जैसे ही किसी विद्यार्थी का जन्मदिन आता है, पूरे गुरुकुलम् परिसर में उल्लास और प्रसन्नता का वातावरण बन जाता है। सभी विद्यार्थी एवं शिक्षकगण मिलकर जन्मदिन वाले विद्यार्थी को शुभकामनाएं देते हैं और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
इस विशेष दिन की शुरुआत प्रातःकालीन प्रार्थना और मंगलाचरण से होती है। विद्यार्थी भगवान की आराधना कर अपने जीवन को सद्गुणों से भरने का संकल्प लेते हैं। जन्मदिन वाले विद्यार्थी द्वारा भगवान का अभिषेक, शांतिधारा या दीप प्रज्वलन किया जाता है, जिससे उसके मन में श्रद्धा, विनम्रता और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। यह परंपरा बच्चों को यह सिखाती है कि जीवन का प्रत्येक महत्वपूर्ण क्षण ईश्वर के स्मरण और आशीर्वाद से प्रारंभ होना चाहिए।
गुरुकुलम् में जन्मदिन के अवसर पर सेवा कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। विद्यार्थी गौशाला में जाकर गायों को चारा व गुड़ खिलाते हैं, पक्षियों के लिए दाना डालते हैं तथा स्वच्छता जैसे कार्यों में भाग लेते हैं। इससे बच्चों के भीतर करुणा, दया और जीवों के प्रति प्रेम की भावना विकसित होती है। वे यह समझ पाते हैं कि सच्चा आनंद केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए कुछ करने में निहित है।
इस अवसर पर गुरुजनों द्वारा विद्यार्थी को जीवनोपयोगी सीख और संस्कारपूर्ण संदेश दिए जाते हैं। आचार्यगण उसे अनुशासन, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और आत्मसंयम का महत्व समझाते हैं। साथ ही यह भी बताया जाता है कि जीवन केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों का भी नाम है। इन प्रेरक वचनों का बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है और वे उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं।
जन्मदिन समारोह के दौरान सभी विद्यार्थी मिलकर भजन, देशभक्ति गीत या प्रेरणादायक प्रस्तुतियाँ देते हैं। इससे सामूहिकता, सहयोग और आत्मविश्वास की भावना का विकास होता है। जन्मदिन वाला विद्यार्थी भी अपने अनुभव साझा करता है और यह संकल्प लेता है कि वह गुरुकुल की मर्यादाओं का पालन करते हुए समाज और राष्ट्र के लिए एक श्रेष्ठ नागरिक बनेगा।
गुरुकुलम् में मनाया जाने वाला यह जन्मदिन उत्सव बच्चों को भौतिक दिखावे से दूर रखकर सादगी, अनुशासन और संस्कारों से जोड़ता है। यहाँ उपहारों से अधिक महत्व शुभकामनाओं, आशीर्वाद और प्रेरणा को दिया जाता है। यही कारण है कि गुरुकुलम् के विद्यार्थी न केवल शैक्षणिक रूप से, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक रूप से भी सुदृढ़ बनते हैं।
अंततः कहा जा सकता है कि श्री अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी के गुरुकुलम् में विद्यार्थियों का जन्मदिन उत्साह, संस्कार और सेवा का अनुपम उदाहरण है। यह परंपरा बच्चों के जीवन को सही दिशा देने, उनमें मानवीय मूल्यों का संचार करने और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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27 अगस्त 2025: गुरुकुलम् के छात्रों द्वारा पर्युषण पर्व का पावन उत्सव: भक्ति, साधना और संस्कारों का अद्भुत संगम
श्री नवागढ़ गुरुकुलम् के छात्रों द्वारा जैन धर्म के परम पावन एवं आध्यात्मिक महत्त्व से परिपूर्ण *पर्युषण पर्व* को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक संस्कारों के साथ भव्य रूप से मनाया गया। यह पर्व आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और आत्मनिरीक्षण का महान अवसर माना जाता है, जिसमें व्यक्ति अपने अंतर्मन की ओर ध्यान केंद्रित कर अपने दोषों का परिमार्जन करता है और सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेता है।
पर्युषण पर्व जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो सामान्यतः दस दिनों तक मनाया जाता है। “पर्युषण” का अर्थ है—‘अपने भीतर ठहरना’ अर्थात आत्मा के समीप रहकर अपने विचारों, वचनों और कर्मों का निरीक्षण करना। इस दौरान अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, क्षमा, संयम और तप जैसे महान मूल्यों को जीवन में उतारने का विशेष प्रयास किया जाता है। इस पर्व का समापन “क्षमावाणी” के साथ होता है, जिसमें सभी से क्षमा याचना कर आपसी वैर-विरोध को समाप्त करने का संदेश दिया जाता है।
इसी पावन भावना के साथ गुरुकुलम् के विद्यार्थियों ने विभिन्न स्थानों पर पूज्य संतों के सान्निध्य में पर्युषण पर्व का लाभ प्राप्त किया। इंदौर में विद्यार्थियों ने पूज्य *आचार्य श्री विभव सागर जी* एवं *आचार्य श्री विनम्र सागर जी* के सान्निध्य में धर्म साधना की, वहीं नागपुर में छात्रों ने *मुनि श्री सुप्रभ सागर जी* के सान्निध्य में इस पर्व को मनाया। संतों का सान्निध्य विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं दुर्लभ अवसर सिद्ध हुआ।
पर्युषण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रतिदिन पूजा-अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा, स्वाध्याय, प्रवचन श्रवण एवं प्रतिक्रमण जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भाग लिया। उन्होंने तप, उपवास, एकासन आदि साधनाओं का भी पालन किया, जिससे उनमें आत्मसंयम, धैर्य और सहनशीलता का विकास हुआ। संतों के प्रवचनों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक सिद्धांतों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
पूज्य आचार्यों एवं मुनि श्री ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधनों में बताया कि पर्युषण पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मपरिवर्तन का महापर्व है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने भीतर की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने तथा सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा दी। साथ ही, उन्होंने क्षमा, करुणा और प्रेम के महत्व को समझाते हुए समाज में सद्भाव और एकता बनाए रखने का संदेश दिया।
इस संपूर्ण आयोजन का प्रभाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। उनमें अनुशासन, विनम्रता, सहिष्णुता एवं आध्यात्मिक जागरूकता का विकास हुआ। पर्युषण पर्व के इस अनुभव ने उनके जीवन में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया और उन्हें एक श्रेष्ठ जीवन जीने की दिशा में अग्रसर किया।
अंततः यह कहा जा सकता है कि श्री नवागढ़ गुरुकुलम् के छात्रों द्वारा मनाया गया यह पर्युषण पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन में संस्कारों, मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का संचार करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। यह अनुभव उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक रहेगा।
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17 अगस्त 2025: नवागढ़ में वृक्षारोपण करके मनाया जन्मदिवस...
श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में रविवार को क्षेत्र निर्देशक एवं श्री नवागढ़ गुरुकुलम् के संस्थापक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया जी के जन्म दिवस पर भव्य वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मंगलाचरण:
श्री नवागढ़ गुरुकुलम के छात्रों ने इस अवसर पर मंगलाचरण करके स्वागत गीत के माध्यम से सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में छात्र धार्मिक संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षा निशुल्क प्राप्त कर रहे हैं
आमंत्रित अतिथि गण:
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री श्री मनोहर लाल जी पंत , भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष टीकमगढ़ श्रीमती सरोज राजपूत, नीति आयोग के सदस्य, श्रीमती अर्चना जैन, जिला पंचायत ललितपुर सदस्य आदि प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि एवं समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहें।
निशांत भैया जन्म दिवस के पक्षधर नहीं:
निशांत भैया जी ने अपने उद्बोधन में कहा हुंडावसर्पिणी पंचम काल में मिथ्या दृष्टि जीव ही जन्म लेते हैं, आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी एवं आचार्य गुरुदेव ज्ञान सागर जी महाराज ने कभी अपने जन्म दिवस को स्वीकृति नहीं प्रदान की, क्योंकि यह जन्म हमारी सांसारिकता को बढ़ाता है। यह जन्म तभी सफल होगा जब हम इस जन्म में अपने सत्कर्मों के द्वारा आत्म कल्याण का पथ प्रशस्त करें तथा संकल्प करें कि मेरे द्वारा मन वचन काय से किसी को आघात न पहुंचे और इस जन्म में अपने जीवन को परमात्मा के सानिध्य में मंगलमय बनाने का संकल्प करें। प्रत्येक जन्मदिन हमारी आयु को अल्प करते हुए हमें आगाह करता है समय कम है अपने कर्तव्य का पालन निष्ठा पूर्वक करें।
स्वागत एवं सम्मान:
कार्यक्रम का संचालन क्षेत्र के महामंत्री श्री वीरचंद जी नैकोरा द्वारा किया गया। क्षेत्र कमेटी द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का भव्य स्वागत एवं सम्मान माला, अंग वस्त्र एवं प्रशस्ति द्वारा किया गया।
सभी अतिथियों ने ब्र. निशांत भैया जी की निष्ठा एवं समर्पित सेवाओं को देखते हुए जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें बधाई देते हुए इसी प्रकार धर्म,समाज और राष्ट्र की सेवा करने की शुभकामना व्यक्त की।
इस अवसर पर क्षेत्रीय समिति एवं स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और संकल्प लिया कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल कर उन्हें वृक्ष का रूप देंगे।
आभार:
नवागढ़ गुरुकुलम के महामंत्री डॉक्टर प्रोफेसर प्रदीप जी छतरपुर ने सभी अतिथियों के आगमन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा आप सभी का इसी प्रकार सहयोग हमें प्राप्त होता रहे जिससे हम पर्यावरण के साथ-साथ जन जीवन को भी स्वस्थ उपहार दे सकें।
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15 अगस्त 2025: *श्री अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में धूमधाम से मना स्वतंत्रता दिवस का पर्व....
श्री अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में स्वतंत्रता दिवस का पर्व देशभक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मनोज राय जी ने ध्वजारोहण कर समारोह का शुभारंभ किया और कहा, “स्वतंत्रता केवल एक उपहार नहीं, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है जिसे हमें सदैव निभाना चाहिए।”
क्षेत्र निर्देशक श्री ब्रह्मचारी जय निशांत जी ने अपने उद्बोधन में कहा, “देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे कर्मों में झलकनी चाहिए। आने वाली पीढ़ियों को भी इस भावना से प्रेरित करना होगा।”
एडवोकेट संदीप जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर यह आज़ादी दिलाई है, हमें इसे एकता और भाईचारे से सुदृढ़ बनाना होगा।”
क्षेत्र के महामंत्री श्री वीरचंद्र जी नैकोरा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “स्वतंत्रता दिवस न केवल हमारे अतीत की वीरगाथाओं को याद करने का दिन है, बल्कि यह हमारे कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को दोहराने का भी अवसर है।”
क्षेत्र के मंत्री श्री अशोक कुमार जी ने कहा, “आज का दिन हमें यह स्मरण कराता है कि हम सभी भारत माता के सपूत हैं और हमें उसके गौरव को बनाए रखना है।”
गुरुकुलम के समस्त शिक्षकों और छात्रों ने भी स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और देशभक्ति गीतों के माध्यम से वातावरण को उत्साह से भर दिया। गुरुकुलम के बच्चों द्वारा प्रस्तुत पिरामिड विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्र महामंत्री श्री वीरचंद्र जी नैकोरा ने सभी अतिथियों, गुरुकुलम परिवार और उपस्थित जनसमूह का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा, “आप सभी के सहयोग और सहभागिता से ही यह आयोजन सफल हो पाया है। इसी तरह हम सब मिलकर राष्ट्र सेवा में योगदान देते रहें।”
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31 जुलाई 2025: नवागढ़ में मनाया गया मोक्ष सप्तमी का पर्व
प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में श्री पारसनाथ भगवान का निर्माण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के सभी बच्चों के साथ मनाया गया। जिसमें विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार जी निशांत जी का रहा।
कार्यक्रम:
कार्यक्रम का प्रारंभ सातवीं सदी के भोंयरे के साथ भू गर्भ से प्रकटित मनोकामनापूर्ण अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ । जिसमें गुरुकुलम के बच्चों द्वारा बड़े ही उत्साह पूर्वक अपनी अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धा राशि समर्पित करके भगवान अरनाथ जी कि शांतिधारा की एवं तत्पश्चात दैनिक पूजन के साथ भगवान पारसनाथ स्वामी का विधान हुआ।
सानिध्य:
कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्र महामंत्री वीरचंद्र जी नैकोरा एवं क्षेत्र निर्देशक श्री ब्रह्मचारी जय निशांत जी भैयाजी के द्वारा तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कमठ के द्वारा किए गए उपसर्ग एवं पारसनाथ भगवान की सहनशीलता एवं क्षमाशीलता के बारे में बताते हुए गुरुकुलम के सभी छात्रों को पारसनाथ भगवान के निर्माण महोत्सव की विशेष जानकारी दी गई।
आशीर्वाद:
महामंत्री वीरचंद जी ने नवागढ़ क्षेत्र के इतिहास एवं गुरुकुलम् के बारे में जानकारी देते हुए सभी लोगों को आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के द्वारा किए गए पंचकल्याणक उनके आशीर्वाद एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी का विशेष आशीर्वाद नवागढ़ को प्राप्त हो रहा है अवगत कराते हुए आचार्य श्री ज्ञान सागर जी एवं स्वस्तिभूषण माताजी के प्रति अपना विनम्र भाव निवेदित किया।
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10 जुलाई 2025: अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व – श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का अनुपम उत्सव...
अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी की पावन धरा पर गुरु-शिष्य परंपरा का आदर्श स्वरूप उस समय देखने को मिला, जब गुरुकुलम् में गुरु पूर्णिमा का पवित्र पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरु पूर्णिमा का यह दिन भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसी भाव को आत्मसात करते हुए गुरुकुलम् के सभी विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं के उपकारों को स्मरण कर उन्हें हृदय से नमन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन मंगलाचरण एवं गुरु वंदना से हुई। संपूर्ण गुरुकुल परिसर गुरु महिमा के भाव से ओत-प्रोत हो उठा। विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से गुरु स्तुति, भजन एवं प्रेरणादायक वचन प्रस्तुत कर यह संदेश दिया कि गुरु ही अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने जीवन में गुरुओं के योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर गुरुकुलम् के संचालक ब्र. जय निशांत जी भैयाजी का विशेष रूप से सम्मान किया गया। विद्यार्थियों ने पुष्प, तिलक एवं वंदन के माध्यम से उनका अभिनंदन करते हुए उनके मार्गदर्शन, अनुशासन और प्रेरणादायी नेतृत्व के लिए कृतज्ञता प्रकट की। साथ ही गुरुकुलम् में अध्यापन कार्य से जुड़े सभी शिक्षकों का भी सम्मान किया गया, जिनके सतत परिश्रम और समर्पण से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव हो पा रहा है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु केवल हमें पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा, संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी प्रदान करते हैं। गुरु के सान्निध्य में रहकर ही विद्यार्थी अपने व्यक्तित्व को निखारता है और समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी नागरिक बनता है। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इन भावनात्मक विचारों ने वातावरण को अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान गुरुकुलम् के आचार्यों एवं शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को आशीर्वचन प्रदान किए। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध केवल शिक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर चलने वाला पवित्र बंधन है। उन्होंने विद्यार्थियों को सदैव सत्य, संयम, सेवा और संस्कार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया तथा गुरु के बताए मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा दी।
गुरु पूर्णिमा का यह पर्व केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर गुरुकुलम् की जीवंत गुरु-शिष्य परंपरा का सशक्त उदाहरण बना। विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने गुरुओं की शिक्षाओं को जीवन में उतारेंगे और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को समाज में आगे बढ़ाएंगे।
अंततः कहा जा सकता है कि अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी में मनाया गया गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की भावनाओं से परिपूर्ण रहा। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च है और उनके उपकारों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।
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04 जुलाई 2025: श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी का प्रथम समाधि दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न
श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी का प्रथम समाधि दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुकुलम् के सभी विद्यार्थी, समस्त शिक्षकगण, संस्था प्रमुख श्री जयनिशांत भैया जी तथा समिति के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सम्पूर्ण परिसर आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन एवं पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विद्यार्थियों द्वारा भक्ति गीत, स्तुति एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनसे वातावरण और भी भक्तिमय बन गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी के महान जीवन, उनके तप, त्याग, संयम और साधना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उनका संपूर्ण जीवन मानवता के उत्थान, आत्मकल्याण एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित रहा। *समाधि दिवस* के महत्व को समझाते हुए कहा गया कि यह केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मानुशासन और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर है। समाधि का वास्तविक अर्थ है—मन, वचन और कर्म की पूर्ण शुद्धि के साथ आत्मा का परम शांति एवं उच्च चेतना में स्थित होना।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि राष्ट्रसंत का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची सफलता बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति, संयम और सादगी में निहित होती है। उनके आदर्शों को अपनाकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
इस अवसर पर संस्था प्रमुख *श्री जयनिशांत भैया जी* ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि “राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी केवल एक संत नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा थे। उनका जीवन अनुशासन, तपस्या और सेवा का अद्वितीय उदाहरण है। हमें उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए उनका जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से कभी विचलित नहीं हुए। आज के समय में जब जीवन में अनेक आकर्षण और विचलन हैं, तब उनके आदर्श हमें सही दिशा प्रदान करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि “गुरुकुलम् का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और आध्यात्मिकता का विकास करना है। राष्ट्रसंत के विचारों को अपनाकर विद्यार्थी अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकते हैं और समाज में एक आदर्श नागरिक के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं।”
कार्यक्रम के दौरान समिति के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्रसंत के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। अंत में सभी उपस्थित जनों ने राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री विरागसागर जी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
यह संपूर्ण आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेरणा एवं सकारात्मक संदेश से परिपूर्ण रहा, जिसने सभी के हृदय में राष्ट्रसंत के प्रति श्रद्धा को और अधिक गहरा कर दिया।
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श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में विद्यार्थियों की दिव्य दिनचर्या: अभिषेक एवं शांतिधारा से होती शुभ शुरुआत
श्री नवागढ़ गुरुकुलम् में विद्यार्थियों का प्रत्येक दिन एक अत्यंत पवित्र, अनुशासित और आध्यात्मिक वातावरण में आरंभ होता है। यहाँ की दिनचर्या केवल शैक्षणिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास—विशेष रूप से उनके नैतिक, आध्यात्मिक और संस्कारिक उत्थान—पर केंद्रित है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु गुरुकुलम् के छात्र प्रतिदिन प्रातःकाल भगवान का *अभिषेक* एवं *शांतिधारा* करके अपने दिन की शुभ शुरुआत करते हैं।
प्रातःकालीन बेला में जब संपूर्ण वातावरण शांति और पवित्रता से परिपूर्ण होता है, तब गुरुकुलम् के सभी विद्यार्थी एकत्रित होकर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का अभिषेक करते हैं। अभिषेक केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अंतर्मन की पवित्रता का प्रतीक है। जल, दुग्ध एवं अन्य पवित्र द्रव्यों से भगवान का अभिषेक करते समय विद्यार्थी अपने मन में विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण की भावना विकसित करते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें यह सिखाती है कि जीवन में शुद्धता और सरलता का कितना महत्व है।
अभिषेक के पश्चात शांतिधारा का आयोजन किया जाता है। शांतिधारा का तात्पर्य है—समस्त जीवों के कल्याण, विश्व शांति एवं आत्मिक उन्नति के लिए की जाने वाली प्रार्थना। जब विद्यार्थी एक साथ शांतिधारा करते हैं, तो वह दृश्य अत्यंत मनमोहक और प्रेरणादायक होता है। सामूहिक रूप से उच्चारित मंत्रों की मधुर ध्वनि वातावरण को और भी पवित्र एवं ऊर्जावान बना देती है। यह अभ्यास विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक सोच को विकसित करता है।
इस संपूर्ण प्रक्रिया का प्रभाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। नियमित अभिषेक और शांतिधारा के माध्यम से उनमें अनुशासन, समयपालन, संयम एवं आध्यात्मिकता के गुण विकसित होते हैं। दिन की शुरुआत जब इस प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा और शुद्ध विचारों के साथ होती है, तो उसका प्रभाव उनके पूरे दिन के व्यवहार, अध्ययन और गतिविधियों पर पड़ता है।
गुरुकुलम् के आचार्य एवं शिक्षकगण भी विद्यार्थियों को इस आध्यात्मिक साधना का महत्व समझाते हैं और उन्हें इसके माध्यम से आत्मविकास के लिए प्रेरित करते हैं। यह परंपरा न केवल भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है, बल्कि विद्यार्थियों को एक श्रेष्ठ नागरिक बनने की दिशा में भी अग्रसर करती है।
अतः कहा जा सकता है कि श्री नवागढ़ गुरुकुलम् की यह दिव्य परंपरा विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम है। अभिषेक एवं शांतिधारा के माध्यम से प्रारंभ होने वाला प्रत्येक दिन उनके जीवन में शांति, संतुलन और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
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01 जुलाई 2025: गुरुकुल में नए सत्र का शुभारंभ ‘प्रवेशोत्सव’ के साथ मनाया गया
श्री अतिशय क्षेत्र नवागढ़ गुरुकुलम में नए शैक्षणिक सत्र का आरंभ उत्साह, उमंग और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। गुरुकुल परिवार ने परंपरानुसार नए सत्र की शुरुआत ‘प्रवेशोत्सव’ के रूप में मनाई, जिसमें छात्रो, शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहभागिता देखने योग्य रही।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण एवं सरस्वती वंदना से हुई, जिसके माध्यम से गुरुकुल प्रांगण में ज्ञान, अनुशासन और सद्भाव का पावन संदेश गूंज उठा। इसके पश्चात गुरुकुल के शिक्षकों ने दीप प्रज्वलित कर नए सत्र का विधिवत शुभारंभ किया।
प्रवेशोत्सव के अवसर पर संचालक महोदय जी ने अपने प्रेरणादायी शब्दों में कहा कि नया सत्र नए संकल्प, नई ऊर्जा और बेहतर उपलब्धियों का प्रतीक है। उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वास, अनुशासन और समर्पण के साथ अध्ययन करने का संदेश दिया।
इस दौरान नए प्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा उन्हें गुरुकुल की परंपराओं, दिनचर्या और अध्ययन–अनुशासन से अवगत कराया गया। वरिष्ठ छात्रों ने भी नवागंतुकों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें सहयोग और मार्गदर्शन का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनमें बच्चों ने भजनों, समूहगान और प्रेरणादायी कविताओं के माध्यम से नई शुरुआत का उत्साह व्यक्त किया।
अंत में आभार व्यक्त करते हुए प्रबंध समिति ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की और गुरुकुल परिवार को नई सफलताओं के लिए प्रेरित किया।
प्रवेशोत्सव का पूरा आयोजन सौहार्द्र, अनुशासन और आध्यात्मिकता की छवि प्रस्तुत करता हुआ अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी रहा।
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