13 November 2018

अर्थव्यवस्था बरबाद होगे

भले कोनो पार्टी म दम नई हे,
फेर रैली म जवईया मन के टेस,
विधायक ले कम नई हे,
हाथ म पार्टी के झंडा अउ,
मुँह म बीरोपान हे,
पागे हे फोकटहा फटफटी,
तहाँ देखावत अपन शान हे,
दूदी सौ के रोजी म,
नारा लगईया के भरमार हे,
राजनीति के चिखला,
सादा कुरथा के व्यापार हे,
वर्तमान के व्यवस्था म,
राजनीति हर दाद होगे,
अउ चुनाव सेती देस के,
अर्थव्यवस्था बरबाद होगे।।

11 November 2018

बाँचगे खाली लोटा

बिन पेंदी के लोटा खेलय,
राजनीति के गोंटा,
अठन्नी बनगे खर-खर भईया,
सिक्का होगे खोटा,
जेने बनथे संगी भईया,
उही मसकथे टोंटा,
आस जम्मो छरियागे भईया,
छरियागे सबके पोटा,
खदर-बदर हे विचार ह भईया,
जुच्छा जाही नोटा,
दुआ-भेदी के अंगरा हे भईया,
लूट डरिस जी कोटा,
काजू-मेवा खादी के भईया,
बपरा मन के चरोटा,
बरगे चिक्कन घर हर भईया,
बाँचगे खाली लोटा।

04 November 2018

महूँ खड़े हँव

ए कका! देसी ल छोड़,
अंग्रेजी ल गटक,
एती-तेती झन बिचार,
मोरे चिनहा म ठप्पा पटक,
चार दिन बर तुंहर ले छोटे हँव
तहाँ पांच साल बर महीं बड़े हँव,
देखे रइहव ददा-भाई,
चुनाव बर महूँ खड़े हँव,
पुराना गोठ हे काबर,
गोठ नवा ल धर,
पाँच सौ के पत्ती देत हँव
जादा चिक-चिक झन कर,
अरे! परिवार के,
कका-बेटा संग लड़े हँव
देखे रइहव ददा-भाई,
चुनाव बर महूँ खड़े हँव।।

01 November 2018

सुरता सीजी डॉट कॉम का विमोचन

सुरता सीजी डॉट कॉम का विमोचन

नवागढ़ के सुप्रसिद्ध छंदकार और साहित्यकार श्री रमेश कुमार सिंह चौहान के कृतियों को संग्रहित करते हुए सुरता सीजी डॉट कॉम नामक वेबसाइट का विमोचन राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष और भाषाविद डॉ. विनय पाठक द्वारा फीता काट कर किया गया।
    विशेष अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त शिक्षक और वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कुमार भट्ट 'पथिक' गुरतुर गोठ डॉट कॉम के प्रधान सम्पादक और सुप्रसिद्ध गीतकार श्री बुधराम यादव, सुप्रसिद्ध छंदकार और साहित्यकार तथा भाषाविद श्री चन्द्रशेखर सिंह, साहित्यकार श्री विनोद कुमार पांडे उपस्थित थे।
     रमेश कुमार सिंह चौहान ने बताया कि यह वेबसाइट नये रचनाकारों के लिए स्वर्णिम अवसर होगा साथ ही इसमें छत्तीसगढ़ी के दुर्लभ शब्दों, वरिष्ठ साहित्यकारों का परिचय भी उपलब्ध होगा।
    वेबसाइट को डेवलपमेंट श्री छत्रधर शर्मा ने किया था। मुख्य अतिथि श्री विनय पाठक ने कहा कि आज नवागढ़ ने साहित्यिक के क्षेत्र में इतिहास गढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह वेबसाइट आने वाले समय में युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत होगा।
     वरिष्ठ साहित्यकार श्री भट्ट जी ने कहा कि वेबसाइट का लांच होना नवागढ़ के लिए गर्व की बात है और यह रमेश कुमार सिंह चौहान की बड़ी उपलब्धि के रूप में स्मरण रहेगा।
     संचालन व्यंग्यकार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने किया। अन्य साहित्यकारों में डॉ. राजेश मानस, विनोद कुमार पांडे, जगदीश प्रसाद देवांगन, श्री सुनील शर्मा 'नील' श्री देव गोस्वामी, पण्डित देवल शर्मा, होरीलाल साहू तथा सहयोगी के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रमोद पाठक, श्री भूपेश दुबे, सन्तोष देवांगन, श्री रविन्द्र शर्मा, श्री दिलीप जायसवाल, श्री नारायण निर्मलकर, श्री सुरेंद्र चौबे जी उपस्थित थे।

30 October 2018

बीमारी से बांचे के उपाय (संकलित अउ अनुवादित)

सबले पहिली बिहिनिया उठके 2 से 3 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए अउ पानी ल हमेशा बइठ के पीना चाहिए। पानी ल पीयत समय चाय बरोबर एकक घूंट पीना चाहिए एखर से पाचन क्रिया मजबूत हाथे।
एखर बाद दूसर काम पेट साफ करे के हवय। पानी पीये के बाद शौचालय जाना चाहिए। पेट के सही ढंग से साफ नई होय ले 108 प्रकार के बीमारी होय के संभावना रहिथे। खाय के कम से कम डेड़ घंटा बाद पानी पीना चाहिये।
अउ का - का कर सकत हन

1. खाय के बाद मही, दही ल जरूर पी सकत हन। बिहिनिया हमेशा जूस पीना चाहिए अउ दूध ल हमेषा रात के पीना चाहिए।
2. फल ल हमेशा बिहिनिया खाना चाहिए अउ मंझनिया घलो खा सकत हन।
3. जहाॅं तक हो सकय त शक्कर ल छोड़ के गुड़ के प्रयोग करना चाहिए। शक्कर हर बहुत कन बीमारी के जड़ आय। खाना बनाय म हमेशा काला नमक या सेंधा नमक के प्रयोग करना चाहिए।
4. आयोडीन के कमी ल सफेद प्याज अउ कच्चा भांटा हर दुरिहा कर देथे। बिहिनिया के भोजन ल हो सकय त सूर्य उगे के 3 से 4 घंटा के भीतर कर लेना चाहिए काबर के ए समय मनखे के जठराग्नि तेज होथे। खाये के बाद 20 मिनट बर डेरी डहर करवट लेके सूत जाना चाहिए एखर से आराम मिलथे।
5. रात के खाये के बाद तुरते नई सूतना चाहिए। रात के खाय के बाद थोरकिन घूमना-फिरना चाहिए। खाय के कम से कम 2 घंटा के बाद सूतना चाहिए।
6. मैदा के जिनिस जइसे पिज्जा, बर्गर आदि नई खाना चाहिए काबर के ए जिनिस मन ल सड़ा के बनाय जाथे।
7. सूते के बेरा हमशा मुड़ी ल उत्ती डहर करके सूतना चाहिए। एमा एक ठन बात अउ हवय के जेन मनखे हर ब्रह्मचारी हवय तेन पूर्व दिशा मुड़ी करके सूतयं अउ नइये तेन हर दक्षिण दिषा करके सूतय, उत्तर अउ पश्चिम डहर मुड़ी करके बिल्कुल नई सूतना चाहिए।
अगर ये उपाय ल नियम से करे जाय त 1 से 2 महीना के म हमर दिनचर्या स्वस्थ अउ बढ़िया हो जही।
संकलन अउ अनुवाद
(स्रोत-पत्रिका समाचार पत्र)
मनोज कुमार श्रीवास्तव
शंकरनगर नवागढ़
जिला-बेमेतरा छ.ग.
मो. 9406249242

27 October 2018

अशोक के रूख

संकलित अउ अनुवादित
(स्रोत- पत्रिका समाचार पत्र)

शास्त्र म लिखे गे हवय कि अशोक के रूख हर अड़बड़ चमत्कारी हवय। अगर अशोक के रूख घर म लगे हवय त कोनो समस्या अउ दुख तकलीफ तीर-तखार म नई फटकय। अशोक वृक्ष से कई प्रकार के धन-संपत्ति अउ कई ठन समस्या ल दूर करे जा सकत हवय।
अशोक के पत्ता ल घर के दरवाजा म वंदनवार के रूप म लगाये जाथे। एखर से घर म नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव नई पड़य। एखर पत्ता के उपयोग धार्मिक कार्य म होते रहिथे। अषोक के रूख हर सदाबहार हवय। ये हर हर मौसम म हरा-भरा अउ सुंदर दिखथे।
रावण हर अपन वाटिका म अशोक के रूख लगाय रहिस हवय तेखर सेती वो वाटिका के नाव अशोक वाटिका रखीस हवय। जब रावण हर सीता माता ल हर के लेगीस हवय त सीता माता हर वोही अशोक के रूख के तरी म बइठिस तभे सीता माता के दुख दूर होइस हवय। एखर सेती एखर पौराणिक महत्व जादा हवय। एखर तरी म बइठ के पूजा-पाठ करे जाय त मन ल शांति अउ सकारात्मक फल मिलथे।
अषोक के रूख 2 प्रकार के होथे-पहला रूख जेखर पत्ता हर रामफल के समान अउ फूल हर नारंगी रंग के होथे। दुसरइया अशोक जेखर पत्ता हर आमा के पत्ता कस अउ फूल हर सफेद होथे। जेन घर म ये रूख लगे रहिथे वो घर म धन-संपत्ति के कोनो कमी नई होवय।
अगर कोनो मनखे धन के कमी ले परेषान हवय त वो हर अशोक के रूख के जड़ ल नेवता देके अपन घर म लाके तिजोरी, दुकान या पवित्र जगहा म रख दीही त ओला धन-संपत्ति के कमी नई होवय।
पति-पत्नी के बीच म अगर तनाव हवय त अशोक के सात ताजा पत्ता ल देवी देवता के प्रतिमा के आघू म रखना चाहिए अउ जब वो पत्ता हर मुरझा जावय त दूसर सात पत्ता ओमेर रखना चाहिए अउ सुखाय पत्ता ल पीपल के रूख के तरी म डार देना चाहिए। ए उपाय से पति-पत्नी के बीच म मया हर बाढ़थे।
जब घर म कोनो मंगल कार्य होथे त अशोक के पत्ता ल वंदनवार लगाना चाहिए। वंदनवार अइसे लगाना चाहिए कि अवइया-जवइया के मुड़ म वो पत्ता हर छुवावय। अउ जादा ऊपर म नई लगाना चाहिए। एखर पत्ता ल घर के मुख्य द्वार म लगाना चाहिए, एखर से नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नई कर सकय। अइसे माने जाथे कि जेन मेर ये पत्ता ल लगा दे जाय त ओखर प्रभाव हर छः महीना तक बन रहिथे। एखर पत्ता ल लगाय के बाद वोला तब तक नई हेरना चाहिए जब तक कोनो नया मांगलिक कार्य घर म फेर न हो जाय।
       
संकलन अउ अनुवाद
शंकर नगर नवागढ़,
मनोज कुमार श्रीवास्तव
जिला- बेमेतरा, छ.ग. 491337
मो. 9406249242

24 October 2018

ठलहा बर गोठ

एदारी नगर प्रतिनिधि,
कोन हर बनही,
ओही हर बनही,
जेन हर गनही,
एहू हर पूछे के बात ए,
तहूँ गन देबे त,
रात ह दिन अउ,
दिन ह रात ए,
एक झन मनखे चुनाव जीतके,
खुर्सी म बइठगे,
खुर्सी म बइठिस तहाँ
मुरई कस अइंठगे,
अब आन ल बइठारही,
चार महीना बाद ,
वोहू ला उतारही,
ए हर नगर प्रतिनिधि के नोहे,
नांगर प्रतिनिधि के चुनाव ए,
बइला सुखागे त कोंटा म बांध दे,
नवा बइला लाके जुड़ा म फांद दे।।

20 October 2018

लोकतंत्र का व्यापार

सियासत के पुतले,
मन ही मन
मचल रहे हैं,
बाजार में हर तरफ,
खोटे सिक्के ही,
चल रहे हैं,
नेता तो बोस थे,
आज तो देश में
केवल अभिनेता हैं,
दलालों की नीति,
देश के विक्रेता हैं,
चौथा स्तम्भ भी,
चाटुकारिता का,
किरदार है,
स्वार्थ का चबूतरा,
लोकतंत्र का,
व्यापार है।

10 October 2018

महफिल का भार

शादी की महफिल में,
हाइलोजन के भार से,
दबा कंधा,
ताशे और ढोल का,
वजन उठाये हर बंदा,
हाइड्रोजन भरे गुब्बारे,
सजाने वालों का पसीना,
स्टेज बनाने गड्ढे खोदने का,
तनाव लिये युवक,
चूड़ीदार परदों पर,
कील ठोंकता शख्श
पूड़ी बेलती कामगर,
महिलाओं की एकाग्रता,
कुर्सियाॅं सजाते,
युवकों का समर्पण,
कैमरा फ्लैश में,
चमकते लोगों की शान,
कहीं न कहीं,
इन सबका होना जरूरी है,
किसी की खुशी
किसी की मजबूरी है,
ये सभी मिलकर,
बनाते वादी हैं,
इन सबकी खुशियों से ही,
धूम से होती शादी है।

06 October 2018

आत्मा का धिक्कार

अहंकार के घोड़े पर सवार हो,
मदद का टुकड़ा काटने चला था,
छाॅंट रखा था दिखावे का मन मैंने,
खैरात में मिले,
खैरात को बाॅंटने चला था,
जब वह नेत्रविहीन होकर भी,
मुझे निहार रही थी,
तब मेरी आत्मा,
मुझे धिक्कार रही थी।
मेरे पेट की आॅंतों में,
तृप्ति का गागर था,
आॅंखों की पुतली में,
नींद का सागर था,
स्वार्थ के दायरे में,
हर साज अपना था,
चलते सुस्त कदमों में,
विलासिता का सपना था,
उसकी अॅंतड़ियों में,
’भूख’ की नागिन,
फुंफकार रही थी,
तब मेरी आत्मा,
मुझे धिक्कार रही थी।
अश्कों की बूंदों को,
बहाना तो चाहा था,
हमदर्दी का काजल,
लगाना तो चाहा था,
दहलीज को पारकर,
पहचान बनाना चाहा था,
शैतानी ताकत को भी,
वह ललकार रही थी,
तब मेरी आत्मा,
मुझे धिक्कार रही थी।
गलतवहमी के आसमान में,
उड़ता जा रहा था,
भ्रम की जंजीरों से,
जकड़ता जा रहा था,
उसकी सहजता को,
लाचारी का नाम दे रहा था,
उसके भोलेपन को,
दया का इल्जाम दे रहा था,
हकीकत को नजरें,
स्वीकार रही थीं,
तब मेरी आत्मा,
मुझे धिक्कार रही थी।

05 October 2018

अच्छाई को पूज

बने-बनाये शब्दों पर
तू क्यों फंदे!
कलम सलामत है तेरी,
तू लिख बंदे,
उम्मीद मत कर कि कोई,
आयेगा तुझे,
तेरे दर पे सिखाने,
इंसां को देख,
तू खुद सीख बंदे,
बुराई लाख चाहे भी,
तुझे फंसाना,
अच्छाई को पूज,
खुद मिट जाएंगे,
विचार गंदे।

28 September 2018

तेरा वजूद मेरा वजूद

मिट जाएगा तेरा वजूद,
फिर भी तेरी पहचान होगी,
मरने के बाद भी तेरी छाती पर
तिरंगे की शान होगी
और मेरा क्या है!
मुझे तो राह चलते मुसाफिर,
छोड़ आएंगे दो गज जमीन के नीचे,
तू अकेला भी कुर्बान होगा दुनिया में
तो पूरे देश की छाती में तेरी आन होगी,
तुझे देखकर मुझे भी हर बार
माँ के कर्ज से उतरने का मन करता है
लेकिन सुविधाओं की दरख्तों में
खो गया है मेरा जीवन,
घाटियों में भी तेरी जिंदगी आलिशान होगी,
तेरी हर शहादत पे
मैं भी सोचता हूँ कि
वह मरना ही क्या
सस्ते में जान जाए,
मौत हो ऐसी
कि महफ़िल भी बुरा मान जाए,
पर मैं वही का वही हूँ
और तेरे  कदम पे
सारी दुनिया मेहरबान होगी।।

25 September 2018

मत गिरने दो

मन में आत्मा में आँखों में,
मीठी-मीठी बातों में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
स्नेह में ममत्व में भावनाओं में,
मूल्यों में सम्मान में दुआओं में,
हर क्षेत्र हर दिशाओं में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
वादों में इरादों पनाह में,
विश्वास में परवाह में,
वांछितों की चाह में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
आवाज में अंदाज में,
प्रजा में सरताज में,
कल में आज में,
हर रूप में हर राज में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
सुख-दुख में त्यौहारों में,
एक में हजारों में,
मौन में इशारों में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
समीप में दूरी में,
बलात में मजबूरी में,
शान में, जी हुजूरी में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
जमीन पर ऊंचाई में,
भीड़ में तन्हाई में,
रोजी-रोटी की कमाई में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
हाट में बाजार में,
मेले में त्यौहार में,
पवित्रता की आड़ में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
नेतृत्व में अभिनय में,
सहयोग में, संबंधों में,
नेत्रधारित अंधों में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
सड़कों में पगडंडियों में,
मैदानों में,
हर जगह हर पायदानों में,
चरित्र गिर रहा है,
मत गिरने दो।
रक्तों में भक्तों में,
सशक्त और अशक्तों में,
रंगों में रिस्तों में,
सतत और किस्तों में,
मेरी आत्मा का चित्र,
इन दायरों में घिर रहा है,
किंतु अपना चरित्र,
मैं नहीं गिरने दूंगा।

22 September 2018

गवर्मेंट रुट है

काॅलेज के प्रोफेसर ने,
छात्रा से श्रृंगार रस का उदाहरण पूछा,
छात्रा उत्तर दे रही थी-
"राम को रूपनिहारत जानकी"
प्रोफेसर ने बीच में टोकते हुए कहा-
"पुराना डाॅयलाग मत सुनाओ,
हमें कुछ नया चाहिए"
छात्रा चुप खड़ी रही,
प्रोफेसर ने फटकारते हुए कहा-
जल्दी सुनाओ नहीं तो,
खींच के लगाउंगा बेंत में,
छात्रा कह उठी-"सन्-सनन्-सांय-सांय
हो रही थी खेत में,
सर! आप ही ने कहा था-
"अपने दिमाग का
सारा पट खोल देना,
जब कोई पंक्ति ना मिले तो,
यही पंक्ति बोल देना"
परीक्षा हाल में अंग्रेजी का,
पेपर चल रहा था,
बगल में बैठा प्रोफेसर,
तंबाकू मल रहा था,
उसी वक्त एक छात्र ने,
जोर से आवाज लगाई,
पानी! पानी! पानी!
प्रोफेसर ने कहा-"चुप रहो!
यहाँ लड़कों को,
पानी एलाउ नहीं है,
ये परीक्षा हाल है,
कोई प्याउ नहीं है"
छात्र ने कहा- "सर!
अभी तो मेरे बगल में,
बैठी लड़की ने,
1 घंटे में,
4 ग्लास पानी पी है,
  उससे तो आपने,
कोई शिकायत नहीं की है"
प्रोफेसर ने कहा- "बेवकूफ!
यह तो गवर्मेंट रूट है,
तेरे बगल में बैठी कन्या है!
उसे 50: आरक्षण की छूट है।"

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